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Sunday, July 24, 2016

my kisan dost

पोधो के लिए आवश्यक खाद तत्व के बारे में जानकारी khaad ke bare me

Podho ke liye important khaad tatvo ki jankari hindi me 

podho ke liye jaruri khad
खाद तत्व 

हेल्लो किसान दोस्तों नमस्कार।
आप सभी को अच्छी बरसात मानसून की शुभकामनाये। दोस्तों जैसा की अभी कुछ time बाद सभी लोग बुआई करेंगे। और उनकी फसल का अच्छा उत्पादन ले सके ये भी प्रयास सभी किसान दोस्त करेंगे और में भी अपने खेतो में व्यस्त हो जाउँगा। मित्रों आप सभी जानते हो की स्वस्थ शरीर के लिए अच्छा और postik आहार की आवश्यकता होती है। वैसे ही अच्छी फसल के लिए अच्छे  खाद् और उचित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यक होती है। जैसे मनुष्य के लिए दाल,रोटी,चावल,हरी सब्ज़ियाँ,सलाद,पापड़,चटनी,आचार,अंडे,दूध,फल और भी कही सारे postik aahar की जरूरत होती हे।उसी तरह अच्छी और स्वस्थ फसल के लिए बहुत से प्रकार के खाद् की आवश्यकता होती है। आज की इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे की फसल की कोन कोन से खाद् की जरूरत होती हे और उनका क्या उपयोग होता है। फसल के लिए ।
फसलो के लिए इन 16 तरह के खादों की आवश्यकता होती है।

वायुमंडल से मिलने वाले खाद् तत्व जैसे सूर्य का प्रकाश हवा पानी आदि से।

1 कार्बन (CO2) 
2 हाइड्रोजन (H2)
3 ऑक्सीजन (O2)

फसल के लिए मुख्य खाद् के तत्व primary nutrient

1 नाइट्रोजन nitrogen (N)
फसल के लिए उपयोगीता :-
नाइट्रोजन यानी नत्र से पोधो के आकर में वार्द्धि होती है। पत्तों के आकर बढ़ने में सहायक होता है। पोधो की कोशिकाओं में रस के निर्माण में अति आवश्यक होता है।पोधो में पूरा विकास और पत्तों को हरा करने में सहायता करता है। फसल के दानो को बढाता है। यह पोधो में प्रोटीन को बडाता है। अनाज और चारे में प्रोटीन को बढाता है।
2 फास्फोरस (P) 
फास्फोरस के benifit:-
नाइट्रोजन की अधिकता से होने वाले नुकसान को रोकना। बीजो के अंकुरण में आवश्यक जड़ों के विकास में सहायक फूलों का फाल बढ़ाने में आवश्यक फसल में फलो की व्रद्धि करना। पोधो में एक समान वर्द्धि करना।प्रकाश सश्लेषण की क्रिया को तेज़ करना। पोधो में प्रोटीन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बडाना। बीजो का वजन बढाना स्वस्थ बीज का बनाना।
3 पोटेशियम पलाश (K) 
पोटेशियम पोधो के लिए आवश्यकता:-
पोधे द्वारा पतो में बनाये गये कार्बोहायड्रेट और प्रोटीन को फलो में भेजता है। ताकि फलो का उचित विकास हो पाये। पोधो में रंग qwalti और test बढ़ाने का काम करता है। पोधो को जल्दी गिरने से रोकता है और उसमे लगने वाले रोगों से लड़ता है। अनाज के दानो में चमक बढाता है। पोधो को जल्दी सूखने से रोकता है।

SECONDARY NUTRIENTS खाद तत्व 

1 केल्सियम (Ca) 
पोधो में सेलवाल की मज़बूती बडाता है। दलहन फसलो में प्रोटीन को बढाता है। आलू मूंगफली और तम्बाकू जैसी फसलो के लिए बहुत ही लाभकारी होता है।
2 मैग्नेशियम (Mg)
पोधो का सूर्य से भोजन बनाने की क्रिया में important work करता है।
फसल के पत्तों में हरित द्रव के निर्माण में help करता है। पोधो में प्रोटीन वसा कार्बोहाईट के निर्माण करता है। चारे वाली फसलो में अधिक लाभ मिलता है।
3 सल्फर - गंधक  (S) 
सल्फर पोधो में प्रोटीन आदी बढ़ाने का कार्य करता है। पोधो की जड़ों का विकास बढाता है। और फसल की उत्पादन क्षमता बडाता है। यह सरसों प्याज़ और लहसुन की फसल में आवश्यक होता है। यह प्रोटीन वसा अम्ल विटामिन्स का निर्माण में सहायक होता है।

MICRO NUTRIENTS खाद तत्व 

1 जिंक - जस्ता (Zn)
 पोधो में उत्पादन केपिसिटी बडाता है। पानी के प्रमाण को control करता है। Auxin का निर्माण करता है। पोधो की बाढ में सहायक। केरोटिन प्रोटीन हार्मोन्स सश्लेषण में सहायक होता है। क्लोरोफ़िल उतप्रेरक में सहायता करता है।
2 बोरान(B)
फुल और फलो के निर्माण में सहायक।पोधो में केल्शियम को भेजने में सहायता करता है। प्रजनन कार्य और परागन में सहायक होता है। यह केल्सियम और पोटेशियम के अनुपात को नियंत्रित करता है। दलहन वाली फसलो में जड़ ग्रन्थि के विकास में सहायता करता है।
3 आयरन - लोहा  (Fe) 
पोधे के पत्तो में प्रकाश सश्लेषण की क्रिया मे हरितद्रव्य बनाने में हेल्प करता है। क्लोरोफिल और प्रोटीन का निर्माण में सहायता करता है। यह पोधो की श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
4 मैगनीज (Mu)
पोधो में प्रकाश सश्लेषण की आक्सीडेशन और रिडीएशन क्रिया में सहायक होता है।
एन्जाईम बढाने में मदद करता है।
5 कापर - ताबा (Cu) 
पोधे में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। पोधो में प्रोटीन और विटामिन ए को बनाता है। कवक रोगों को नियंत्रित करता है।
6 मालीब्ड़ेनम (Mo) 
पोधे में जो नाइट्रोजन होता है उसे प्रोटीन में बदलता है। पोधो में विटामिन सी (C) और शकर्रा के सश्लेषण में सहायक होता है।
नोट:- किसान भाई किसी भी खाद् का उपयोग अपने खेतो में करने से पहले मिट्टी परीक्षण आवश्यक रूप से करवाए ताकि ताकि उचित मात्रा और अनुपात के हिसाब से फसल को खाद् मिल पाए।
इन खादों की कमी से जो लक्षण फसल में दिखते है। उन्हें जानने के लिए नीचे दी गयी लिंक को खोले
खाद् की कमी से होने वाले पोधो पर लक्षण यहाँ देखे।

किसान दोस्त ये महत्वपूर्ण पोस्ट भी ज़रुर पढ़े।

बोरवेल लगाने के लिए जमींन में पानी का पता केसे करे।
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Monday, July 4, 2016

my kisan dost

Kese pata kre ki aapki fasl ko konse khaad ki jarurt hai पोधो में खाद की कमी के लक्षण जाचे।

खाद् की कमी से पोधो पर दिखने वाले लक्षण के बारे में जाने!

Khaad ki kami,podho pr lagne wale rog,soyabin ki kheti kese kre
नमस्कार मित्रों बहुत से किसानों ने अपने खेतो में सोयाबीन और अन्य फसल की बुआई कर दी है। पिछली पोस्ट में मैने आपको बताया था की fasl or podho ke liye aavshyak khaad tatv kon kon se hote hai. नही जानते तो यहाँ पढ़े।
दोस्तों खेती एक ऐसा विषय है। जिसमे हम जितना ज्यादा जानकारी लगे उतना ही ज्यादा लाभ ले पायेंगे। जहाँ से भी जैसे भी खेती के बारे में। खेती के आधुनिक तरीके या अन्य जानकारी हमें लेना चाहिए। आज की मेरी इस पोस्ट का उद्देश्य यह है की आप खुद अपनी फसल को देख कर उसके रोगों या अन्य कमी को जाँच कर उसका उपचार कर सके। में आभारी हु उन कृषि  विज्ञानिक मोहदय का जिन्होंने समय समय पर सेमिनार और बातचीत कर के मुझे इस विषय में अमुल्य जानकारी प्रदान की ।जिससे में उचित समय पर उचित खाद् और दवाई का उपयोग कर अच्छी पैदावार ले पता हु।
आज में आपको खाद् की कमी से फसल में दिखने वाले लक्षण के बारे में बताउगा। ताकि आप भी अपनी फसल में खाद् की कमी से होने वाले लक्षण को पहचान कर उनकी पूर्ति कर अच्छा उत्पादन ले सके।
खादों की कमी से पोधो में दिखने वाले लक्षण 
1 नाइट्रोजन:-
 नाइट्रोजन की कमी से पौधे पीले पड़ते है।
जड़ों और पोधो की प्रोग्रेस रुक जाती है।
न्यू अंकुरण व फूलों में कमी आती है।
पोधो की निचली पत्तिया गिरने लगती है जिसे क्लोरोसिस कहते है। फलदार पोधो का गिर जाना और पोधो का बोना दिखना और फसल का जल्दी पक जाना ये सब नाइट्रोजन की कमी के लक्षण होते है।
2 फोस्फोरस:-
फोस्फोरस की कमी के कारण पोधो का विकास नही हो पाता है।
पोधे के पत्ते दूसरी तरफ से बैगनी हलके नीले रंग के हो जाते है।
पोधो की जड़ो का समुचित विकास नही हो पाता हे और कही बार जड़े सुख भी जाती है।
इसकी कमी की वजहा से फलो सही तरीके से नही पक पाते हे। पोधे के तना गहरा पीला हो जाता हे। 
3 पोटशियम:-
 पोधो के पत्ते गिरने लगते है।
 इसकी कमी से पत्तों की किनारों पर भूरे और पीले रंग के दाग लगते है।
और पत्तों के ऊपरी सिर झुलसे हुए दीखते है।
4 आयरन:-
पोधो में वर्द्धि रुक जाती है।
इसकी कमी के कारण पत्तों का ऊपरी हिस्सा पीला पड़ने लगता है।
पत्तियों की किनारों और नसों का अधिक समय तक हरा बना रहना।
नई कलिकाओ का मर जाना और पोधो के तानो का छोटा रहा जाना।
5 बोरान:-
बोरान की कमी के कारण फूल पर भूरे दाग पड़ने लगते है। और फल फट जाते है।
इसकी कमी के कारण फूलों में परागण ठीक तरीके से नही हो पाता है और फूल पोधे से गिरने स्टार्ट हो जाते है।
6 जिंक:-
पत्ते झड़ने लगते है। पोधो के पत्ते छोटे छोटे रह जाते है। और उनका ऊपरी भाग पीला हो जाता है।
गेहू के उपरी 3 या 4 पत्तियों का पीला पड़ना।
फलो का आकर छोटा रहना और पैदावार में कमी आना।
7 मलीब्डेनम:-
इसकी कमी से पत्ते के दूसरे हिस्से में चिपचिपा भूरे रंग का द्रव जमा हो जाता है।
इसकी तत्व की कमी के कारण पहले पत्ते पीले होते है और उसके ऊपर भूरे रंग के दाग पड़ने लगते है।
टमाटर की निचली पत्तिया मुड़ जाती है। फिर मोल्टिंग व नेक्रोसेस रचनाये बन जाती है।
8 कापर:-
इसकी कमी के कारण पोधो में डायबक जैसा रोग हो जाता है।
कापर की कमी के कारण पोधो का ऊपरी हिस्सा विकास नही कर पता है।
9 केल्सियम:- 
 केल्सियम की कमी के कारण नई पत्तों के किनारे मूड और सुकुड जाते हे।
फल और सब्ज़ियाँ बिना पके ही मुर्जा जाते है।
जड़ों का विकास कम होता हे और ग्रन्थियो की संख्या में कमी हो जाती है।
10 सल्फर( गंधक):-
 नई पत्तियों का पिला पड़ना बाद में सफ़ेद हो जाना तना ज्यादा विकसित ना हो पाना
सरसों की पत्तियों का पायलेनुमा हो जाना।
11 क्लोरिन:-
 इसकी कमी के वजह से बरसीम की पत्तिया एक सामान नही रहती हे उनमें छोटी मोटी पत्तिया होने लगती है। बन्द गोबी के पत्ते मुड़ना स्टार्ट हो जाते है।
12 मैग्नीशियम:-
 यह चारे वाली फसल के लिए बहुत जरूरी होता है।
इसकी कमी के कारण पत्तिया पूरी तरह से विकसित होने से पहले ही उनका ऊपरी सिरा मुड़ जाता है।
दलहन वाली फसलो में पत्तों की मुख्य नसों का बीच वाला भाग पीला पड़ जाता है।
NOTE:- दोस्तों इन तत्वों की कमी को बहुत ही बारीकी से समझना जरूरी होता है। क्यों की बहुत सी बार खेत में नाइट्रोजन की अधिकता के कारण भी फसलो के पत्तों का रंग पीला हो जाता है और कमी के कारण भी और ऊपर पोस्ट में आपने पड़ा होगा की और भी कई तत्वों से पत्ते पीले पड़ सकते हें। इसलिए आप जिस भी खाद् का उपयोग करे उस से पहले मिट्टी परीक्षण की जाँच रिपोर्ट और किसी विद्वान से ज़रुर पूछे फिर डाले।
Dosto आपको ये पोस्ट केसी लगी हमें comment में ज़रुर बताये और फेसबुक पर हमारा pege और पोस्ट like ज़रुर करे। इस तरह की जानकारिया फ्री में लगातार पाने के लिए email subcraibe की पूरी जानकारी पढ कर हमारी साइड से जुड़े। 

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Saturday, June 11, 2016

my kisan dost

किसान बीज बुआई से पहले करे बीज अंकुरण का परीक्षण kese kre beej ankurn ki jach

Hello kisan dosto

बीज अंकुरण परीक्षण केसे करे ।

 जून का महिना चल रहा है। और इस month के last में 20 से 30 तक मानसून आ जाता है। और सभी किसान के चेहरे खिलखिला जाते है। और वो अपने खेतो में फसल बोने के लिए तैयार रहते है। अभी m.p. और अन्य राज्यों में सोयाबीन की फसल बड़े पैमाने पर लगाई जाती है।
पिछले साल असमय बरसात और अल्प वर्षा के कारण soyabeen की फसल में किसानों को काफी भारी मात्रा में नुकसान हुआ।उस नुकसान के चलते किसान के पास अच्छी qwaylty के सोयाबीन के बीज नही बन पाये। इसे से किसानों को बीज या तो ख़रीद के लाना पड़ा या जो बीज पैदा हुआ उसे ही use करना पड़ेगा इसी स्थिति में उसके लिए अनिवार्य हो गया है। की वो
Seed germination test करे।

बीज अंकुरण जाँच के क्या benifit है।

Beej ankuran ki jach करने से किसान दोस्तों को बीज की गुणवत्ता यानि seed qwailty का पता चल जाता है। और कितना उत्पादन होगा वो भी आकलन हो जाता है। इसके अलावा उसे कितनी मात्रा में बीज बोना है। वो भी आसानी से पता चल जाता है। जिससे वो बीज उपचार कर बीजो की अंकुरण capesity बड़ा सके।

बीज अंकुरण परीक्षण केसे और कब करे।

 बीज के अंकुरण का परीक्षण कम से कम बुआई के एक सप्ताह पहले अवश्य कर ले।
ताकि यदि आपको बीज बदलना या बढ़ाना हो तो आप सही समय पर निर्णय ले सके। 80 से 90% तक यदि आपके बीजो का अंकुरण होता है। तो आपका बीज अच्छा है। और 60 से 70% तक अंकुरण होता है। तो आप बुआई में थोड़ी सी मात्रा बड़ा दे। और अगर आपके बीज 50 या उस से कम अंकुरण हो तो आप बीज बदल दे ताकि पैदावार में आपको नुकसान ना हो।
बीज अंकुरण किन किन विधि यों से करे।
हम यहाँ पर आसान और घरेलू बीज अंकुरण विधियों का उपयोग कर के बीज परीक्षण करेंगे।

1 जुट की टाट सूती कपड़ा विधि:-


seed test
इस विधि से बीज अंकुरण की जाँच करने के लिए बीज वाली बोरी या बीज को कही से भी बिना छाटे मुट्टी भर बीज ले फिर  उन्हें बोरी बरदान जुट के या सूती कपडे के छोटे से टुकड़े पर लगभग 100 दाने बिना सलेक्ट किये बिछा दे फिर उस टाट को पानी से गिला कर दे। और उसी से दानो को ढाक दे और उसे ठंडी गीली अँधेरी जगहा पर रख दे टाट को दिन में 2 या 3 बार हल्का पानी छिडकते रहे 5 ya 6दिन तक उसके बाद कपडे या टाट को खोल कर उगे हुए यानि अंकुरित बीजो की सख्या गिन ले । और उनका प्रतिशत निकाल ले

2 अखबार बीज अंकुरण विधि:-

My kisan dost
Newspaper seed germination method
यह बहुत ही अच्छी और सरल विधि है। इसमे आप चार परत में एक न्यूज़ पेपर ले फिर उसे फोटो में बताये गये तरीके से 3 या चार सामान हिस्सों में मोड़ लो फिर उसमे बिना छटनी किये बीजो को कतार बना कर बिछा दे फिर उसकी हलकी सी घड़ी कर पेपर के दोनों मुहँ को धागे से हल्का सा बांधे ताकि दाने नीचे ना गिरे फिर उन्हें पानी से भरे हुए बर्तन में 1 या 2 मिनिट तक रखे ताकि पेपर पूरी तरह से गीला और भिग जाए फिर आप उसे एक पोलिथिन में भर के मुँह बाँध कर छाया दार जगह पर रख दे  चार पांच दिन बाद उसे खोल कर देखे उसमे कितने दाने अंकुरित हुए है। उन दानों से आप अंकुरण का प्रतिशत निकाल ले।
आपको ये पोस्ट केसी लगी हमें comment में ज़रुर लिखे आप से बात कर के मुझे अच्छा लगेगा।
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Monday, February 15, 2016

my kisan dost

सरल तरीके से किसान गोबर की खाद केसे बनाये

गोबर खाद

सरल तरीके से किसान गोबर की खाद् केसे बनाये gobar ki khaad

मेरे बहुत सारे दोस्तों ने मुझसे खाद् के बारे में जानकारियां मागी तो आज हम इस पोस्ट खाद् बनाने की विधिया बताउगा। 1गोबर की खाद्
2कंपोस्ट खाद्
और अगली पोस्ट में बाकी जो और खाद् बनाने की जो विधिया हे वो बताउगा ।
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