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Sunday, February 5, 2017

Yash- Jat

Quiona ki kheti kese kare क्विनवा की खेती की पूरी जानकरी

नमस्कार दोस्तों अभी कुछ समय से मैने कई सारे किसानों के खेतो में किनोवा की फसल लगी हुई देखी तो मैने सोचा क्यों ना इसकी जानकरी my kisan dost से जुड़े सभी पाठकों को दी जाये तो  वैसे तो क्विनवा की खेती करने के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नही होती है फिर भी नई फसल और खेती के बारे जानना ज़रुरी होता है !

किनोवा (Quiona) की खेती केसे करे 

Qvino ki kheti kese kre
अजित सिंह क्विनवा की फसल के साथ 

सामान्य परिचय → 

क्विनवा बथुआ प्रजाति का सदस्य है जिसका वनस्पति नाम चिनोपोडियम क्विनवा है ग्रामीण एरिया में शब्द उच्चारण के कारण इसे किनोवा, केनवा आदि कई नाम से बताया जाता है! इसकी खेती मुख्य रूप से दक्षिण  अमेरिकी देशों में की जाती है! जिसमे इंग्लैंड,कनाडा,आस्टेलिया,चाइना ,बोलिविया ,पेरू इवाडोर आदि 
क्विनवा की खेती इस फसल को रबी के मौसम में उगाया जाता है ! इसका उपयोग गेहू चावल सूजी की तरह खाने में किया जाता है!

जलवायु और मिट्टी का प्रकार →

इसकी खेती करने के लिए कोई विशेष जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता नही होती है यह पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी और  बंजर भूमि में भी लगाया जा सकता है भारत की जलवायु इसके लिए अनुकूल है इसके बीज अंकुरण के लिए 18 से 24 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है! अच्छी पैदावार के लिए रात में ठण्ड और दिन में 35 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है!

खेत की तैयारी →

खेत की तैयारी के लिए खेत को अच्छी तरह से 2 और 3 बार जताई कर के मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए अंतिम जताई से पहले खेत में 5,6,टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद् मिला देना चाहिए फिर उचित जल निकास की व्यवस्था करनी चाहिए !

क्विनवा की बुआई →

आप इसकी बुआई ओक्टुम्बर , फरवरी,मार्च  और कई जगह जून जुलाई में भी कर सकते है  इसका बीज बहुत ही बारीक़ होता है इसलिए प्रति बीघे में 400 से 600 ग्राम पर्याप्त होता है  इसकी बुआई कतरों में और सीधे बिखेर कर भी कर सकते है! इसका बीज खेत की मिट्टी में 1.5 सेमी से 2 सेमी तक गहरा लगाना चाहिए  जब इसके पौधे 5,6 इंच के हो जाये तब पौधे से पौधे के बीच  की दूरी 10 से 14 इंच बना लेनी चाहिए exrta पौधे को हटा देना चाहिए !

सिचाई और खरपतवार →

बुआई के तुरंत बाद सिचाई कर देना चाहिए इसके पौधे को बहुत ही कम पानी की आवश्यकता होती है फसल लगाने से काटने तक 3 से 4 बार पानी देना पर्याप्त रहता है! जब पौधे छोटे रहे तब खतपतवार को निकलवा देना चाहिए 

किट और रोग प्रबंधन →

क्विनवा के पौधे में किटो और रोगों से लड़ने की बहुत ज्यादा capesity रहती है साथ ही पाले और सूखे को भी सहन कर सकते है ! अभी तक इस पर किसी भी प्रकार के रोगों की जानकरी नही मिली है!

फसल की कटाई →

क्विनवा  की फसल 100 दिनों में तैयार हो जाती है अच्छी विकसित फसल की ऊचाई 4 से 6 फिट तक होती है इसको सरसों की तरह काट कर थ्रेसर मशीन में आसानी से निकाल सकते है बीज को निकालने के बाद कुछ दिनों की धुप  आवश्यक होती है ! प्रति बीघा उत्पादन 5 से 8-9 क्विंटल तक होता है!

क्विनवा के बारे में और अधिक जानकारी →

1 इंटर नेशनल  बाज़ार में इसका भाव 500 से 1000 रूपये किलो तक है 
2 100 क्विनवा में 14 ग्राम प्रोटीन ,7 ग्राम डायटरी फाइबर 197 मिली ग्राम मैग्नेशियम 563 मिली ग्राम पोटेशियम 0.5 मिली ग्राम विटामिन B पाया जाता है।
3  इसका प्रतिदिन सेवन करने पर हार्ट अटेक,केंसर,और सास सम्बन्धित बीमारियों में लाभ मिलता है।
4 कम पानी और कम खर्च में अच्छा लाभ देने वाली फसल है।
5 इसके पत्तों की भांजी बना कर भी खाया जा सकती है।
6 यह खून की कमी को दूर करता है
⇛ इसके बीज आसानी से किसानों के पास उपलब्ध है ! इसे नीमच म.प्र. की मंडी में भी बेचा जा सकता है। और यदि किसी किसान भाई के पास अच्छे भाव मिलने वाली मंडी या contact farming करने वाली कम्पनी के no हो तो कमेंट में ज़रुर लिखे ताकि सभी किसान भाइयों को इसका लाभ मिल सके।
**Abhi marke ret kam hai kisan bhai lagan se pahle local ret confirm kr le **
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स्ट्राबेरी की खेती कैसे करे 
⇒एलोविरा की खेती की जानकारी 
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Thursday, September 29, 2016

Yash- Jat

gehu ki kheti kese kre puri janakri hindi me

नमस्कार दोस्तों अभी लगभग सभी किसान भाई अपने खेतों में से सोयाबीन की कटाई कर नई फसल के लिये खेत की जुताई की तैयारी में लगे हुए है कुछ भाई ने लहसुन भी बो दिया है और कुछ अन्य फसल जैसे सरसों मेथी अस्कोगोल गेहू आदि फसल बोयेंगे जो दोस्त गेहूँ की फसल बोने वाले है  उनके लिए आज की पोस्ट बड़े काम की है क्यों की आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे की गेहू की खेती कैसे करे और कोन सी किस्में लगाने से कितना फ़ायदा होगा साथ ही हम गेहूँ के भंडारण के  बारे में और फसल में लगने वाले खादों के बारे में भी जानेंगे इसलिए आखिरी तक पूरी जानकरी ज़रुर पढ़े ! 
Gehu ki new kisme verayati

भूमि का चुनाव/तैयारी

गेहूँ की खेती करते  समय भूमि का चुनाव अच्छे से कर लेना चाहिए । गेहूँ की खेती में अच्छे फसल के उत्पादन के लिए मटियार दोमट भूमि को सबसे सर्वोत्तम माना जाता है । लेकिन पौधों को अगर सही मात्रा में खाद दी जाए और सही समय पर उसकी सिंचाई की जाये तो किसी भी हल्की भूमि पर गेहूँ की खेती कर के अच्छे फसल की प्राप्ति की जा सकती है । खेती से पहले मिट्टी की अच्छे से जुताई कर के उसे भुरभुरा बना लेना चाहिए फिर उस मिट्टी पर ट्रैक्टर चला कर उसे समतल कर देना चाहिए

जलवायु:-

गेहूँ के खेती में बुआई के वक्त कम तापमान और फसल पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की जरूरत होती हैं। इसलिए गेहूँ की खेती ज्यादातर अक्टूबर या नवम्बर के महीनों में की जाती हैं।

बुआई:-

गेहूँ की खेती में बीज बुआई का सही समय 15 नवम्बर से 30 नवम्बर तक होता है । अगर बुआई 25 दिसम्बर के बाद की जाये तो प्रतिदिन लगभग 90kg प्रति हेक्टेयर के दर से उपज में कमी आ जाती है । बीज बुआई करते समय कतार से कतार की दूरी 20cm होनी चाहिए ।

बीजोपचार:-

गेहूँ की खेती में बीज की बुआई से पहले बीज की अंकुरण क्षमता की जांच ज़रूर से कर लेनी चाहिए अगर गेहूँ की बीज उपचारित नहीं है तो बुआई से पहले बीज को किसी फफूंदी नाशक दवा से उपचारित कर लेना चाहिए ।
उन्नत किस्में:- शरबती : पुष्प मंगल ; सुजाता ; लोक वन; 1544; जे .डब्ल्यू 47 ; मोहन मंडल ; 322 ; 1661 ; 1644 आदि

गेहूँ की नवीन उन्नत किस्मे 

1. जे.डब्लू.-1106: यह मध्यम अवधि (115 दिन) वाली किस्म हैं जिसके पौधे सीधे मध्यम ऊँचाई के होते हैं बीज का आकार सिंचित अवस्था में बड़ा व आकर्षक होता हैं शरबती तथा अधिक प्रोटीन युक्त किस्म है जिसकी औसत  उपज 40 - 50 क्विंटल  प्रति हेक्टेयर है।
2. अमृता (एच.आई. 1500): यह शरबती श्रेणी की नवीनतम सूखा निरोधक किस्म है।  इसका पौधा अर्द्ध सीधा तथा ऊँचाई 120 - 135 से. मी. होती है। दाने मध्यम गोल, सुनहरे (अम्बर) रंग एवं चमकदार होते है। इसके 1000 दानों का वजन 45 - 48 ग्राम और बाल आने का समय 85 दिन है। फसल पकने की अवधि 125 - 130 दिन तथा आदर्श परिस्थितियों में 30 - 35 क्विंटल  प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
3. स्वर्णा (एच.आई.-1479): समय से बोने  हेतु मध्य प्रदेश की उर्वरा भूमियों के लिए शीघ्र पकने वाली गेरूआ निरोधक किस्म है। गेहूँ का दाना लम्बा, बोल्ड, आकर्षक, शरबती जैसा चमकदार व स्वादिष्ट होता है। इसके 1000 दानो का वजन 45 - 48 ग्राम होता है। फसल अवधि 110 दिन हे। इस किस्म से 2 - 3 सिंचाइयों से अच्छी उपज ली जा सकती है। गेहूँ की लोक-1 किस्म के विकल्प के रूप में इसकी खेती की जा सकती है।
4. हर्षित (एचआई-1531): यह सूखा पाला अवरोधी मध्यम बोनी (75 - 90 से. मी. ऊँचाई) शरबती किस्म है। इसके दाने सुडौल, चमकदार, शरबती एवं रोटी के लिए उत्तम है जिसे सुजाता किस्म के विकल्प के रूप में उगाया जा सकता है। फसल अवधि 115 दिन है तथा 1 - 2 सिंचाई में 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक उपज देती है।
5. मालव शक्ति (एचआई - 8498): यह कम ऊँचाई वाली (85 से.मी) बोनी कठिया (ड्यूरम) किस्म है। यह नम्बर - दिसम्बर तक बोने हेतु उपयुक्त किस्म है। इसका दाना अत्यंत आकर्षक, बड़ा, चमकदार, प्रोटीन व विटामिन ए की मात्रा अधिक, अत्यंत स्वादिष्ट होता है। बेकरी पदार्थ, नूडल्स, सिवैयाँ, रवा आदि बनाने के लिए उपयुक्त है। बाजार भाव अधिक मिलता है तथा गेहूँ निर्यात के लिए उत्तम किस्म है। इसकी बोनी नवम्बर से लेकर दिसम्बर के द्वितीय सप्ताह तक की जा सकती है। इसकी फसल लोक-1 से पहले तैयार हो जाती है। इससे अच्छी उपज लेने के लिए 4 - 5 पानी आवश्यक है।
6 . मालवश्री (एचआई - 8381):यह कठिया गेहूँ की श्रेणी में श्रेष्ठ किस्म है। इसके पौधे बौने (85 - 90 से.मी. ऊँचाई), बालियों के बालों का रंग काला होता है। यह किस्म 4 - 5 सिंचाई मे बेहतर उत्पादन देती है। इसके 1000 दानों का वजन 50 - 55 ग्राम एवं उपज क्षमता 50 - 60 क्विंटल  प्रति हेक्टेयर है।
7 राज-3077; गेहूँ की ऐसी नयी किस्म है, जिसमें अन्य प्रजातियों की अपेक्षा 12 प्रतिशत अधिक प्रोटीन पाया जाता है। इसे अम्लीय एवं क्षारीय दोनों प्रकार की मिट्टियों में बोया जा सकता है। खाद प्रबंधन:-
गेहूँ की खेती में समय पर बुआई करने के लिए 120kg नाइट्रोजन(nitrogen), 60kg स्फुर(sfur) और 40kg पोटाश(potash) देने की आवश्यकता पड़ती है । 120kg नाइट्रोजन के लिए हमें कम से कम 261kg यूरिया प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल करना चाहिए । 60kg स्फुर के लिए लगभग 375kg single super phoshphate(SSP) और 40kg पोटाश देने के लिए कम से कम 68kg म्यूरेटा पोटाश का इस्तेमाल करना चाहिए ।

सिंचाई प्रबंधन :-

अच्छी फसल की प्राप्ति के लिए समय पर सिंचाई करना बहुत जरूरी होता है । फसल में गाभा के समय और दानो में दूध भरने के समय सिंचाई करनी चाहिए । ठंड के मौसम में अगर वर्षा हो जाये तो सिंचाई कम भी कर सकते है । कृषि वैज्ञानिको के मुताबिक जब तेज हवा चलने लगे तब सिंचाई को कुछ समय तक रोक देना चाहिए । कृषि वैज्ञानिको का ये भी कहना है की खेत में 12 घंटे से ज्यादा देर तक पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए ।
गेहूँ की खेती में पहली सिंचाई बुआई के लगभग 25 दिन बाद करनी चाहिए । दूसरी सिंचाई लगभग 60 दिन बाद और तीसरी सिंचाई लगभग 80 दिन बाद करनी चाहिए ।

खरपतवार:-

गेहूँ की खेती में खरपरवार के कारण उपज में 10 से 40 प्रतिशत कमी आ जाती है । इसलिए इसका नियंत्रण बहुत ही जरूरी होता है । बीज बुआई के 30 से 35 दिन बाद तक खरपतवार को साफ़ करते रहना चाहिए । गेहूँ की खेती में दो तरह के खरपतवार होते है पहला सकड़ी पत्ते वाला खरपतवार जो की गेहूँ के पौधे की तरह हीं दिखता है और दूसरा चौड़ी पत्ते वाला खरपतवार ।
इसके नियंत्रण हेतु 2 -4 डी का छिड़काव करे।

खड़ी फसल की देखभाल;-

कृषि वैज्ञानिको का कहना है की गेहूँ का गिरना यानी फसल के उत्पादन में कमी आना । इसलिए किसानों को खड़ी फसल का खास ख्याल रखना चाहिए और हमेशा सही समय पर फफूंदी नाशक दवा का इस्तेमाल करते रहना चाहिए और खरपतवार का नियंत्रण करते रहना चाहिए ।

 रबी की फसल में लगने वाले रोगों का उपचार कैसे करे यहाँ पढ़े 

फसल की कटनी और भंडाराण:-

गेहूँ का फसल लगभग 125 से 130 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। फसल पकने के बाद सुबह सुबह फसल की कटनी करना चाहिए फिर उसका थ्रेसिंग करना चाहिए । थ्रेसिंग के बाद उसको सुखा लें । जब बीज पर 10 से 12 % नमी हो तभी इसका भंडारण करनी चाहिए ।

गेंहू का देसी तरीके से भण्डारण कैसे करे यहाँ cilik  कर पढ़े 


post write by;-
विष्णु नागर

मित्रों यह पोस्ट हमारे प्रिय मित्र विष्णु जी नागर ने लिखी है आपको यह जानकरी केसी लगी हमें कमेंट के जरिये ज़रुर बताये  और आपके पास भी कोई किसानों के काम की जानकरी हो तो हमें ज़रुर लिखे हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ माई किसान दोस्त पर प्रकाशित करेंगे !
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Tuesday, April 26, 2016

Yash- Jat

अच्छी पैदावार के लिए nai kism ki soyabeen आरवीएस 2001-4 की jaankaari

Soybean ki kheti
किसानों के लिए पीले सोने के नाम से प्रसिद्ध सोयाबीन की फसल पिछले कई सालों से या तो ज्यादा बारिश से गल जाती है। या कम बरसात के कारण ख़राब हो जाती है। सोयाबीन मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बोयी जाती है। और पिछले सालो से लगातार सोयाबीन की फसल ख़राब होने से किसानों की आर्थिक स्थिति में गिरावट आयी है।
मध्यप्रदेश के सीहोर  एग्रीकल्चर कॉलेज के विज्ञानिकों ने नई किस्म की सोयाबीन को ईजाद की है। जिसको आरवीएस 2001-4 के नाम से जाना जाता है।
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Sunday, March 20, 2016

Yash- Jat

काला सोना यानि अफीम की फसल किसानो के लिए वरदान या अभिश्राप ।

काला सोना यानि अफ़ीम की फसल किसानों के लिए वरदान या अभिश्राप

हेल्लो दोस्तों ये एक gest post है। आप भी अपनी मन की बात।यहाँ भेज सकते है।
         ●>>आपके लेख विचार मन की बात केसे भेजे जानने के लिए पढ़े
Afim ki kheti
अफ़ीम  फसल 
काला सोना किसानों के लिए  वरदान या अभिशाप

 Afim (Opium) ki kheti krna kisano ke liye

यह साल अफ़ीम काश्तकार को लिए खून के आँसू रुला रहा है।
अफ़ीम की खेती करने वाला किसान।इस साल ब्रिटिश साम्राज्य में  जो किसानों की हालत थी वैसी हालत हो गयी है। अफ़ीम की फसल की खेती करना मतलब एक नवजात शिशु का पालन करने से भी ज्यादा मेहनती कार्य है। कुछ दिनों पहले आपने अखबार टीवी और न्यूज़ चैनलों पर नीमच,मंदसौर,चित्तौड़गढ़ के किसानों के द्वारा नीमच नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव किया गया वो खबर पढ़ी होगी। जिसमे हजारों की तादाद में किसान एकत्र हुए और अपनी मागो को लेकर ज्ञापन दिया।
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Monday, January 4, 2016

Yash- Jat

प्याज का बीज कैसे तैयार करे किसान (pyaaj ka beej) How to prepare onion seeds.farmar

प्याज का बीज कैसे बनाये
pyaaj ka beej kese banaye

प्याज़ का बीज कैसे तैयार करे किसान

 हेल्लो किसान दोस्तों आज हम प्याज़ का बीज खुद कैसे तैयार करे इस विषय पर जानकारी दूँगा।जैसा की आप सभी जानते है की प्याज़ के बीज का भाव बहुत ही ज्यादा होता है और समय पर सही बीज नही मिल पाता हे। और यदि मिलता भी हे तो बहुत महंगा मिलता है। ऐसे में यदि किसान खुद ही अपने खेत पर बीज तैयार कर सकता है।तो जानते हे की किस तरह बीज बनाये ।
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