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Wednesday, January 18, 2017

Unknown

ड्रेगन फ्रूट की खेती केसे करे cultivation of dragon fruit

aadhunik kheti kese kre
ड्रैगन फ्रूट की खेती 

हेल्लो दोस्तों नमस्कार आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे ड्रैगन फ्रूट की खेती कैसे करे जैसा की दोस्तों आप सभी जानते हो की यदि किसान पारंपरिक फसले और पुराने तरीके से खेती करेगा तो आज के युग में पिछड़ जायेगा इसलिए आज किसान को हाई टेक तरीके और नई फसलो पर ध्यान देना होगा मेरा भी हमेशा से इस साइड www.mykisandost.com के माध्यम से प्रयास रहता है की में अपने पाठको को लेटेस्ट जानकारी प्रदान करता रहू!

   
                                   

ड्रैगन  फ्रूट की खेती कैसे  करे cultivation of dragon fruit

ड्रैगन फ्रूट के बारे में जानकारी (परिचय )⟹

यह फल मुख्य रूप से थाईलैंड,ijrail ,मलेशिया श्री का और वियतनाम में लोकप्रिय है!वहा पर इसकी व्यावसायिक खेती होती है लेकिन अब इसकी खेती भारत में भी कई जगह होने लगी है! जिसकी मुख्य वजह इसकी अच्छी  कीमत का मिलना और कम वर्षा वाले स्थान पर अच्छी पैदावार का होना है!
ड्रैगन फ्रूट के पोधो को बहुत सारे लोग अपने घर में fesion की  तरह गमले में भी लगाते है!इसके फ्रूट से आइसक्रीम jeli  jem ,juse ,के साथ साथ bhuty क्रीम के तोर पर फ़ेस पैक का इस्तेमाल किया जाता है!
ड्रैगन फ्रूट स्वस्थ के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है इस फल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा कई ज्यादा पायी जाती है जो कई सारे रोगों से लड़ने में सहायता करता है इस फल के सेवन से मधुमेह नियंत्रित होती है शरीर में बड़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम करता है hart  releted  बीमारियों में भी काफी लाभदायक रहता है 

ड्रैगन की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु ⟹

इसके पोधो में मौसमी परिवर्तन यानि तापमान का उतार चढ़ाव को आसानी से सहन कर सकते है 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए उपयुक्त रहता है इसके पोधो को ज्यादा धुप वाली उँची जगह पर नही लगाना चाहिए! इसकी  खेती 50% वार्षिक औसत बरसात होने वाली जगह पर आसानी से की जा सकती है!

मिट्टी के प्रकार ⟹

वैसे तो इसकी खेती के लिए कोई विशेष प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता नही होती है आप सभी तरह की कम उपजाऊ मिट्टी में भी इसे लगा सकते है लेकिन व्यावसायिक रूप से आप खेती करना चाहते है तो 5.4 ph मान से 7ph मान वाली मिट्टी में इसे लगाये!

केसे करे खेत की तैयारी ⟹

खेत की तैयारी के लिए पहले खेत को 2 या 3 बार गहरी जूताई कर ले ताकि उसमे सभी प्रकार के खरपतवार नष्ट हो जाये उसके बाद खेत में गोबर वाली खाद् या  वर्मी कम्पोस खाद् खेत की मिट्टी में मिलाये एवं उचित जल निकास  की व्यवस्था रखे 

इसके पौधे केसे तैयार करे ⟹

इसके पौधे तैयार करने के लिए दो तरीके है एक बीज के द्वारा  और दूसरा अन्य पौधे की शाखा(कलम ) द्वारा बीज से पौधे तैयार करने में काफी ज्यादा समय लगता है इसलिए अधिकतर किसान शाखा(कलम ) विधि का ही उपयोग करते है जो की व्यावसायिक खेती के लिए उत्तम होता है!शाखा के जरिये पौधे तैयार करने में स्वस्थ पौधे की छंटाई कर उसकी शाखाओं(कलम ) को 20 सेमी लम्बे टुकड़े का उपयोग करना चाहिए अलग की गयी शाखाओं को रोपने से पहले छाँव में ही रखनी चाहिए !
dregan ke podhe khet me
ड्रैगन फ्रूट प्लांट 

पौधे  लगाने का तरीका ⟹

इसके कमल पोधों को लगाने के लिए एक कतार में 2 मीटर की दूरी छोड़ कर 60 सेमी चोडा और 60 सेमी गहरा गड्डा खोदा जाना चाहिए फिर कलम वाले पोधों को सूखे गोबर और बालू रेत  को 1:1 :2 के अनुपात में मिला कर गड्डे में रोपे गड्डो में मिट्टी के साथ प्रति गड्डे में 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और कम्पोस्ट मिला कर भर दे! इस तरह एक एकड़ ज़मीन में 1700 पौधे लग जायेंगे ड्रैगन फ्रूट के पौधे काफी तेजी के साथ विकसित होते है उन्हें सहारा देने के लिए सीमेंट का पोल और तख्त लगाना चाहिए!

ड्रेगन फ्रूट की सिचाई ⟹

अन्य फसल की तुलना में ड्रैगन फ्रूट को काफी कम पानी की आवश्यकता होती है रो पाई के तुरंत बाद पानी दे फिर एक सप्ताह उपरांत सिचाई करे गर्मी के दिनों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करे ड्रैगन की सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई बेस्ट रहती है!

खाद् और उर्वरक ⟹

इसके पोधों के विकास में जीवाश्म तत्व मुख्य रूप से सहायक होते है!इसलिए प्रति पौधे 10 से 15 किलो तक को जैविक उर्वरक कम्पोस्ट देना चाहिए!जैविक खाद् की मात्रा प्रति दो वर्ष में बढ़ाते रहना चाहिए  पौधे के समुचित विकास के लिए समय समय पर रासायनिक खाद्  भी देना चाहिये जिसमे पोटाश + सुपर फास्फेट +यूरिया  को  40:90:70 ग्राम प्रति पौधा देना चाहिए ! जब पोधों में फल लगना शुरू हो जाये तब नाइट्रोजन की मात्रा कम कर के पोटाश की मात्रा बड़ा देनी चाहिए जिससे अधिक उपज प्राप्त हो सके फूल आने से पहले और फल आने के समय प्रति पौधे में 50 ग्राम यूरिया 50 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम पोटाश देना चाहिए प्रति वर्ष प्रति पोधे में 220 ग्राम रासायनिक खाद् की मात्रा बड़ाई जानी चाहिए अधिकतम मात्रा 1.5 किलो तक हो सकती है 

ड्रैगन फ्रूट के बारे में और अधिक ⟹

इस के पोधों में अभी तक किसी भी तरह के किट और बीमारी नही आयी है!
इसके पौधे एक साल में ही फल देने के लायक हो जाते है  मई जून महीने में फूल लगते है और अगस्त से दिसम्बर तक फल आ जाते है!
प्रति एकड़ 5 से 6 टन उत्पादन होता है 
इसका बाजार में भाव प्रति किलो 200 से 250 तक रहता है!
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अधिक मांग 

लाभ और उपज का गणित ⟹

ड्रैगन फ्रूट  एक सीज़न में 3 से 4 बार फल देता है प्रति फल का वजन लगभग 300 से 800 ग्राम तक होता है एक पोल पर 40 से 100 फल तक लगते है जिनका अनुमानित वजन 15 से 25 किलो प्रति पोल एक एकड़ में अनुमानित 300 पोल  प्रति पोल पर फलो का कम से कम वजन 15 किलो मान लेते है तो  वजन 4500 और बाजार भाव कम से कम 125 रूपये प्रति किलो माने तो भी प्रति एकड़ अनुमानित 5,62,500 की आमदनी होती है

ड्रैगन फ्रूट के पौधे कहा से ख़रीदे ⇒

दोस्तों अब ये ड्रैगन फ्रूट की खेती में अच्छा मुनाफ़ा है तो इसके पौधे कहा से ख़रीदे और इसकी खेती कहा पर देखे तो उसके लिए आपको किसी अच्छी नर्सरी से सम्पर्क करना पड़ेगा उसके लिए आप मुकेश धाकड़ की नर्सरी श्री मारुती नर्सरी में सम्पर्क कर सकते है! उनके मोबाइल no 09981961396 है मुकेश जी के बारे में अधिक जानने के लिए आप ये पोस्ट भी पढ़ सकते है intro with mukesh dhakad rajod
दोस्तों आपको ये जानकारी केसी लगी हमें कॉमेंट कर ज़रूर बताये साथ लेटेस्ट पोस्ट पढ़ते रहने के लिए आप हमारा फेसबुक पेज ज़रूर लाइक करे!
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Wednesday, December 7, 2016

Unknown

kisan Strawberry ki kheti kese kare puri janakri hindi me

straberi ki kheti kese kre
स्ट्रॉबेरी की खेती कैसे करे 
नमस्कार दोस्तों mkd में आपका स्वागत है। दोस्तों मेरा हमेशा ही ये प्रयास रहता है। की में अपने किसान भाइयों के लिए जो लाभकारी जानकारी हो उसके बारे में लिखूं ताकि किसान अधिक लाभ कमा सके। आज की इस पोस्ट में हम बात करेगे की

स्ट्रॉबेरी की खेती कैसे करे  पूरी जानकारी हिंदी में 

स्ट्रॉबेरी की खेती कर कई सारे किसान भाई बहुत अच्छा मुनाफ़ा कमा रहे। तो चलिए जानते है। की स्ट्रॉबेरी की खेती केसे करे।    

स्ट्रॉबेरी के बारे में-

स्ट्रॉबेरी एक बहुत ही नाज़ुक फल होता है। जो की स्वाद में हल्का खट्टा और हल्का मीठा होता है।दिखने में दिल के आकर का होता है। और इसका रंग चटक लाल होता है। ये मात्र एक ऐसा फल है। जिसके बीज बाहर की और होते है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की स्ट्रॉबेरी की 600 किस्में इस संसार में मौजूद है। ये सभी अपने स्वाद रंग रूप में एक दूसरे से भिन्न होती है।स्ट्रॉबेरी में अपनी एक अलग ही खुशबू के लिए पहचानी जाती है। जिसका फ्लेवर कई सारी आइसक्रीम shek आदि में किया जाता है।stroberi  में कई सारे विटामिन और लवण होते है जो स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक होते है।इसमें काफी मात्रा में विटामिन C एवं विटामिन A और K पाया जाता है। जो रूप निखारने और face  में कील मुँहासे आँखो की रौशनी चमक के साथ दाँतों की चमक बढ़ाने का काम आते है इनके आलवा इसमें केल्सियम मैग्नीशियम फोलिक एसिड फास्फोरस पोटेशियम होता है।

स्ट्रॉबेरी की प्रमुख किस्में:-

भारत में स्ट्रॉबेरी की अधिकतर किस्में बाहर से मगवाई हुई है।व्यावसायिक तोर पर खेती करने के लिए प्रमुख वेरायटी 
ओफ्रा
कमारोसा
चांडलर
स्वीट चार्ली
ब्लेक मोर
एलिस्ता
सिसकेफ़
फेयर फाक्स 
आदि किस्में है।

स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु-

वैसे तो इसकी खेती के लिए कोई मिट्टी तय नही है फिर भी अच्छी उपज लेने के लिए बुलाई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है।इसे ph 5.0 से 6.5 तक मान वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है। यह फसल शीतोष्ण जलवायु वाली फसल है जिसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है। तापमान बढ़ने पर  पोधों में नुकसान होता है और उपज प्रभावित हो जाती है।
www.mykisandost.com

केसे करे खेत की तैयारी:-

सितम्बर के प्रथम सप्ताह में खेत की 3 बार अच्छी जुताई कर ले फिर उसमे एक हेक्टेयर जमीन में 75 टन अच्छी सड़ी हुई खाद् अच्छे से बिखेर कर मिटटी में मिला दे। साथ में पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेत तैयार करते समय मिला दे
स्ट्राबेरी के बारे में जानकरी
स्ट्रॉबेरी पौधा 

बेड तैयार करना:-

खेत में आवश्यक खाद् उर्वरक देने के बाद बेड बनाने के लिए  बेड की चौड़ाई 2 फिट रखे और बेड से बेड की दूरी डेड फिट रखे। बेड तैयार होने के बाद उस पर ड्रेप एरिगेशन की पाइपलाइन बिछा दे। पौधे लगाने के लिए प्लास्टिक मल्चिंग में 20 से 30 सेमी की दूरी पर छेद करे। पलास्टिक मल्चिंग के बारे के ज्यदा जानने के लिए यहा पढ़े। open now ⇚
स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने का सही समय 10 सितम्बर से 15 ओक्टुम्बर तक लगा देना आवश्यक है। यदि तापमान ज्यादा हो तो पौधे सितम्बर लास्ट तक लगा ले।

खाद् और उर्वरक-

स्ट्रॉबेरी का पौधा काफी नाज़ुक होता है। इसलिए उसे समय समय खाद् और उर्वरक देना ज़रुरी होता है। जो की आपके खेत के मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट को देखकर देवे। मल्चिंग होने के बाद तरल  खाद् टपक सिंचाई के जरिये देवे।
जिसमे नाइट्रोजन फास्फोरस p2o5 और पोटाश k2o को कृषि विज्ञानिकों की सलाह ले कर समय समय पर देवे 
आवश्यकता होने पर पोधों पर भी समय समय पर छिड़काव करे।

सिंचाई-

पौधे लगाने के बाद तुरंत सिंचाई की जाना चाहिए समय समय पर नमी को ध्यान में रखकर सिंचाई करना चाहिए स्ट्रॉबेरी में फल आने से पहले सूक्ष्म फव्वारे से सिंचाई कर सकते है फल आने के बाद टपक विधि से ही सिंचाई करे।

स्ट्रॉबेरी में लगने वाले किट और रोग-

कीटों में  पतगे मक्खियाँ चेफर, स्ट्राबेरी जड़ विविल्स झरबेरी एक प्रकार का कीड़ा ,रस भृग ,स्ट्रॉबेरी मुकट किट कण जैसे किट इसको नुकसान पंहुचा सकते है।इसके लिए नीम की खल पोधों की जड़ों में डाले इसके अलावा पत्तों पर पत्ती स्पाट ,ख़स्ता फफूंदी,पत्ता ब्लाइट से प्रभावित हो सकती है। इसके लिए समय समय पर पोधों के रोगों की पहचान कर विज्ञानिकों की सलाह में कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करे।

लो टनल का उपयोग:-

पाली हाउस नही होने की अवस्था में किसान भाई स्ट्रॉबेरी को पाले से बचाने के लिए प्लास्टिक लो टनल का उपयोग करे जिसमे पारदर्शी प्लास्टिक चंदर जो 100-200 माइक्रोन की हो उसका उपयोग करना चाहिए प्लास्टिक लो टनल के बारे में अधिक जानने के लिए आप दी गयी लिंक को खोल कर पूरी पोस्ट पढ़े। ⇒ पलास्टिक लो टनल के बारे में जानकारी

शासन की तरफ से अनुदान-

अलग अलग राज्यों में उधानिकी और कृषि विभाग की तरफ से अनुदान भी है। जिसमे प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रेप एरिगेशन फुवारा सिंचाई आदि यंत्र पर 40 से 50%तक अनुदान भी मिल जाता है।

उपज एवं लाभ का गणित-

अच्छी किस्म के प्रति पौधे की कीमत 15 रूपये से लगाकर 25 रूपये तक हो सकती है।
एक बीघा में 10 हजार से लगाकर 12 हजार पौधे अनुमानित लग जाते है। एक स्वस्थ पौधे से 200 ग्राम से 300 ग्राम तक फल प्राप्त किया जा सकता है। दिल्ली मुंबई जैसे महानगरों में स्ट्रॉबेरी की प्रति किलो की कीमत 100 रूपये से लगाकर 200 रूपये तक होती है। यदि देखा जाये तो किसानों लागत से ज्यादा मुनाफ़ा स्ट्राबेरी की खेती में है
दोस्तों आपको ये पोस्ट केसी लगी हमें comment के जरिये जरूर बताये यदि दी गयी जानकरी के बारे में आपको कुछ पूछना हो तो आप मुझे नीचे कॉमेंट कर जरूर पूछे जितनी भी हो सकेगी में आपकी help करने की कोशिश करुँगा
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              जय किसान जय भारत ..........
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Thursday, September 15, 2016

Unknown

Sitafal sarifa ki kheti kese kre puri jankari hindi me

हेल्लो दोस्तों नमस्कार
my kisan dost (खेती और किसानों से रिलेटेड जानकारी हिंदी में ) आपका स्वागत है। मित्रों मुझे थोड़े दिनों पहले मुझे mykisan dost के regular पाठक का मेल आया।उसने मुझसे सीताफल की खेती यानि शरीफा जिसे english में Custard Apple भी कहते है। उसकी जानकारी माँगी उसने जब google पर सीताफल की खेती कैसे करे सर्च किया तो सारे आर्टिकल english में मिले तो उसने मुझे हिंदी में पोस्ट लिखने के लिए कहा तो आज की पोस्ट में हम

- सीताफल (शरीफा) Custard apple की खेती कैसे  करे? के बारे में जानेंगे।

ताकि सभी किसान दोस्तों को इसका फ़ायदा मिल सके।

Custard apple का परिचय:-

सीताफल ki kheti
Custard apple-सीताफल

सीताफल एक मीठा फल हैं जिसमें काफी मात्रा में कैलोरी पायी जाती हैं। यह आयरन और विटामिन सी से भरपूर होता है।इसके इस्तेमाल से कई तरीके के रोगों से छुटकारा मिलता हैं। इसके बीज पत्ते छाल सभी को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।सीताफल का वानस्पतिक  नाम अन्नोना स्क्वामोसा हैं।
यह भारत के सभी  प्रान्तों में पाया जाता है। विशेष रूप से महाराष्ट्र मध्यप्रदेश आंध्र प्रदेश में ज्यादा देखे जा सकते हैं।यह आमतौर पर ढालू जमीन जैसे पहाड़ नदी के किनारे आदि जगह पर देखा जा सकता हैं। यह एक मात्र ऐसा फ़लदार पेड़ होता हैं जिस पर किसी भी प्रकार के रोग नही लगता हैं।

शरीफा के लिए जलवायु:-


सीताफल के पौधे के लिए वैसे तो कोई विशेष जलवायु की आवश्यकता नही होती हैं। फिर भी अच्छे उत्पादन के लिए शुष्क और गर्म जलवायु अच्छी रहती है।ज्यादा ठंड और पाला पड़ने से इसके फल सख़्त हो जाते हैं।और वो पक नही पाते है। वर्षा ऋतु यानी जून जुलाई में फूल और  सितम्बर से नोवेम्बर  में फल लगने और पकने start हो जाते है । उस समय तापमान 40 डिग्री से ज्यादा नही होना चाहिए।

भूमि का चुनाव:- 


सीताफल के पौधों में अच्छे विकास के लिये हलकी दोमट रेतीली मिट्टी,पथरीली,जमीन और ढालू जमीन जहां पर पानी का निकास पूर्ण हो best रहती है।इसके लिए मिट्टी का p.h.मान 5.5 से 7 तक अच्छा रहता है। लेकिन इसे 7-9 p.h मान वाली भूमि पर भी उत्पादन लिया जा सकता है।

सीताफल की मुख्य किस्में:-


सीताफल में बहुत सारी किस्में होती है। में यहाँ जो ज्यादा उपयोग की जाती है। उन किस्मों के बारे में बताउगा।
1 सरस्वती 7 -महाराष्ट्र लगभग फल 50 से 85 प्रति पौधा
2 red custurd- लगभग फलो की संख्या 40 से 50
3 मेमाथ- लगभग फलो की संख्या 50 से 80 फल
4 bitish gawaina-लगभग फलो की 40 से 75
5 ए.ऐम के1-
6 अन्नोना2-
7 चांदसिली-
इनके अलावा- वाशिंगटन pi 107,005 और वालानगर,सीडलिंग आदि हैं।
स्वस्थ फल का वजन 100 ग्राम से लगाकर 150 किलो ग्राम तक हो सकता है ।

पौधे की रोपाई:-


Sitafal की खेती के लिए पौधे को दो तरीके से की जा सकती हैं।
1 नर्सरी में पौधा तैयार कर के
2 बारिश में कलम द्वारा
शरीफा के पौधे को बरसात में लगाना सबसे अच्छा रहता है । इसलिए बरसात पूर्व 4×4 मीटर की दूरी पर 60×60 सेमी.  चौड़े और 80 सेमी. गहरे खड्डे खोदे। खड्डो से निकली हुई मिट्टी में 30 प्रतिशत अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद् और प्रति खड्डा 100 ग्राम डी ए पी मिला कर एक दो अच्छी बरसात हो जाने के बाद पौधों को खड्डो में रोपाई कर दे और ऊपर से हाथों से तने की आसपास की मिट्टी को दबा दे नर्सरी में तैयार अच्छी किस्म के पौधे की कीमत 70 से 100 रूप ये तक होती है।एक हेक्टेयर में अनुमानित 450 पौधे तक लग सकते है।

सिंचाई कैसे करे:-


अगर पौधे लगाने के बाद बरसात आती रहे हो सिंचाई के कोई आवश्यकता नही होती है। लेकिन बारिश ना आने पर अगर पौधे मुरझाये हुए हो तो एक बार सिंचाई कर दे और गर्मी के दिनों में एक week में सिंचाई करे और सर्दी के दिनों में महीने भर में एक बार सिंचाई कर सकते है। फल लगते समय एक सिंचाई ज़रुर करे ताकि व्रद्धि दर बड सके

खाद् और पौधों की देखभाल:-


सीताफल के पौधों को खाद् उर्वरक की बहुत कम आवश्यकता होती हैं। लेकिन अच्छी पैदावार के लिए आप सड़ी हुई गोबर की खाद् और नाइट्रोजन,पोटाश,आदि दे सकते है।प्रति वर्ष फल तोड़ने के बाद पेड़ पर लगी सुखी टहनिया और अधिक बड़ी हुई शाखा को काट के अलग कर देना चाहिए।

--फ़सलों में खाद् की कमी को कैसे पहचाने इस लिंक को ओपन करे--


रोग और किट:-


इस पर किसी भी प्रकार के रोग नही आते है।लेकिन कभी कभी पत्तियों को नुकसान पहुँचने वाले किट और बग़ आ जाये तो दवाई का स्प्रे कर उन्हें ख़तम कर दे और मौसम में परिवर्तन या अन्य कारणों से यदि फूल जड़ने लगे तो भी आप दवाई का उपयोग कर सकते है।

फलो की तुड़ाई :-


एक स्वस्थ सीताफल के पेड़ से औसत 80-100 फल मिल जाते है। फल जब पेड़ पर कठोर हो जाये तब उसे तोड़ लेना चाहिए ज्यादा दिनों तक पेड़ पर फल रहने से वो सख़्त हो कर फट जाता है। सामान्य रूप से पेड़ से फलो को तोड़ने के 6-9 दिनों में पक जाते है। लेकिन इन्हें कृत्रिम रूप से भी पकाया जा सकता है।पेड़ पर पके हुए फल की पहचान आप फल पर काले भूरा रंग के धब्बों जिन्हें ग्रामीण बोली में आँख दिखना कहते है। कर सकते है। पके हुए फलो की बाज़ार में कीमत लगभग 150 किलो तक रहती है।

सीताफल का प्रसंस्करण:-


सीताफल के फल से एक मशीन के द्वारा गुददे और बीज को अलग निकला जाता है। उस निकले हुए गुददे से कड़वाहट ना आयें और सुरक्षित रखने के लिए इस मशीन का उपयोग किया जाता है। एस मशीन से गुद्दे को एक साल तक सुरक्षित रख कर बाज़ार मे अच्छे भाव पर बेच सकते है। इस गूदे का उपयोग आइसक्रीम,रबड़ी और पेय पदार्थ बनाने में किया जाता है। इस मशीन का विकास राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परिय परियोजना(NAIP) योजना के तहत किया गया है।इसकी अधिक जानकारी के लिए राजस्थान के मित्र कृषि महाविद्यालय MPUAT उदयपुर में बाग़वानी विभाग से सम्पर्क करे।

शासन का सीताफल पर अनुदान:-

मध्यप्रदेश और राजस्थान में सीताफल के पौधे किसान अपनी स्वयं की जमीन पर लगता है और उसे जीवित रखता है तो अनुदान मिलता है। अन्य राज्यों के किसान दोस्तों अपने जिले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क करे। और आवेदन दे।अलग अलग राज्यों में योजनाएं और नियम अलग है।मध्यप्रदेश में कम से कम 100 और अधिकतम 1500 पोधों पर अनुदान है।
दोस्तों आपको आज की ये जानकारी केसी लगी मुझे comment ज़रुर बताये।और हमारा फेसबुक pege like जरूर करे। इस जानकारी को आप अपनी सोशल saide पर नीचे दिए गये बटन से शेयर कर अपने मित्रों तक जानकारी पंहुचा सकते है!

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Saturday, May 21, 2016

Unknown

Kese banaye apne ghar pr garh vatika-home gardening tips hindi me

नमस्कार मित्रों ये एक gest पोस्ट है। यदि आपके पास भी किसानों के लिए अपने विचार या कोई idea हो तो हमें लिखे । कैसे लिखना है नीचे दी गयी लिंक को ओपन कर के पढ़े ।

घर पर गृह वाटिका- home garden-  कैसे और क्यों बनाये जाने हिंदी में 

Home garden tips hindi me
होम गार्डन टिप्स 

आज रासायनिक और कीटनाशक के अंधाधून प्रयोग ने जहर को हमारी थाली तक पंहुचा दिया है। जो रासायनिक कीटनाशक, फफुदनाशक,निदानाशक,आदि दवाइयों के प्रयोग का प्रचलन इस तरह बड रहा है।की उसका प्रभाव अब हमारे रोज़मर्रा जीवन यापन के लिए उपयोग हो रही रोटी सब्जी जूस और अंडे आदि में इन रासायनिको  के अंश अत्यधिक आने लगे है।और कभी कभी तो इन रासायनिको की मात्रा इतनी अधिक हो जाती है। की हमारी खाद्य सामग्री खाने योग्य नही रह जाती है।

कैसे होता है इन रासायनिको का उपयोग 

>>अधिक पैसा कमाने के लालच में गाय,भैस,और अन्य दुधारी पशु में अधिक दूध उत्पादन के लिए ऑक्सीटोसिन और बोवेन ग्रोथ हारमोन का इंजेक्शन लगाया जाता है।जिसके दुष्प्रभाव से लड़कियाँ समय से पहले युवा अवस्था और स्त्रियों में अचानक गर्भपात तक हो जाते है। और कैंसर जैसे रोग भी लगने की संभावना बड जाती है।
>>इसी तरह सब्जी और फलो को को समय से पहले पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड ग्लेशियल ऐसेटिक एसिड, पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइट और सोडियम बेंजोएट जैसे रासायनिको से पकाया जाता है। जिसका मानव शरीर पर घातक प्रभाव पड़ सकता है। जिसके कारण नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क सम्बन्धित बीमारियाँ जैसे हेडेक,डिप्रेशन,अनिद्रा,मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन आदि होती है।
और यदि डॉक्टरों का मानना है की coppeg सल्फाएड का 10 mg से ज्यादा का डोज लेने पर किडनी फेल तक हो जाती है।और मोत की भी संभावना बन जाती है। इसे रासायनिको के प्रयोग से डायरिया,बुखार,खून की उल्टियां,चकर आना लो ब्लड फ्रेशर आदि बीमारियां हो जाती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा क्या है। और किसानों को क्या फ़ायदा होगा यहाँ पढ़े open।

इन सभी दुष्परिणामों को देखते हुए आवश्यक हो गया है की हम अपने आँगन बालकनी और गार्डन में किचन आदि जगह पर  गमले में अधिक से अधिक सब्जियों का उत्पादन करे।
इस तरह घर के पास पड़ी थोड़ी सी जगह में भी एक अच्छा होम  गार्डन तैयार कर सकते है।

होम गार्डन (kitchen garden) बनाते समय निम्न बातों का दे ध्यान।

1 गार्डन में सूर्य के प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए।
2 पहले पेपर पर lay out तैयार करे ताकि जगह wastege ना हो जितनी जगह में किचन गार्डन तैयार करना हो उसे 6-10 smal bedsमें divide कर ले।और सभी beds की ऊचाई 6-12 इंच रखे। beds की चौड़ाई एक मीटर से ज्यादा ना रखे। ताकि hend opresion आसानी से कर सके। जैसे खरपतवार निकलना मिट्टी चढ़ाना आदि।
3 सभी beds के बीच में spech छोड़े ताकि सब्ज़ियाँ तोड़ने में आसानी हो ।

Ghar me सब्ज़ियाँ कहा कहा लगा सकते है जानें  open now

4 चलने के लिए छोड़ी गयी जगह पर प्लास्टिक मल्चिंग,स्ट्रामल्च या पाली मल्च का उपयोग करे ताकि खरपतवार नही हो सके।
5 पोषक तत्वों से भरपूर वाली मिट्टी का उपयोग करे और 4 or 5 इंच की वर्निकम्पोस की ley बना सकते है।
6 gardan के चारों कोनों पर फूल वाले पौधे लगाये जैसे गेंदे आदि ताकि sucking pest सब्जियों को नुकसान न पहुँचायें।
7 अधिक ऊचाई वाली सब्ज़ियाँ बेल वाली सब्ज़ियाँ जैसे करेला लोकी  तरोई आदि gardn के बीच में और उत्तर दिशा में लगाये ताकि वह मीडियम साइज़ वाली सब्जियों को छाँव मिल सके।
8 मध्य ऊचाई वाली सब्ज़ियाँ जैसे  धनिया मिर्च भिन्डी पत्तागोभी फूल गोभी आदि बीच में लगाये।
9 gardan के दक्षिण में कम बढ़ने वाली सब्ज़ियाँ लगाये जैसे गाजर मुली आलू अदरक प्याईज शलगम आदि लगाये ।
10  10×10 मीटर श्रेत्रफल के लिए सब्जियों की बिजो की मात्रा निम्न प्रकार से रखे।
मुली 10 ग्राम ,गाजर 20 ग्राम, शलजम 10 ग्राम 
पालक 50 ग्राम,मेथी 20 ग्राम, प्याज़ 10 ग्राम फूल गोभी 5 ग्राम बंद गोबी 5 ग्राम मिर्च 5 ग्राम टमाटर 5 ग्राम खीरा 5 ग्राम 
लोबिया 20 ग्राम । 

एक आदर्श किचन वाटिका के लिए फसल चक्र 

जनवरी माह में :- प्याज,आलू,तरबूज,फुल गोबी 
फरवरी माह में :- बैगन,भिन्डी, करेला,ककड़ी तोरी,मिर्च,तरबूज,खीरा
मार्च माह में :- बेगन,भिन्डी,खीरा,करेला,ककड़ी,तोरी,मुली।
अप्रेल माह में :- मुली पालक,चोलाई
मई माह में :- मुली पालक चोलाई कुल्फा भिन्डी 
जून माह में :- बेगन भिन्डी करेला फुलगोबी मुली टमाटर लोबिया टिंडा प्याज पालक 
जुलाई माह में :- बेगन भिन्डी फुलगोबी टमाटर खीरा लोबिया 
अगस्त माह में :- मुली पालक गाजर भिन्डी 
सितम्बर माह में :- फुलगोबी प्याज टमाटर आलू मुली पालक गाजर लोबिया सलगम
ओक्टम्बर माह में :- फुलगोबी टमाटर प्याज मटर आलू मुली पालक मेथी पतागोबी गाठ गोबी 
नवम्बर माह में :- मुली खिरा सलगम बद गोबी हरी प्याज मेथी बेगन
दिसम्बर माह में :- आलू फुलगोबी बंद गोबी गाजर शलगम 
hello my किसान दोस्तों ये पोस्ट मैंने लिखी है । आपको केसी लगी मुझे commet में जरूर बताये और और फेसबुक pege को लाइक जरुर करे।
आपका dost 

एक प्रगतिशील किसान 
Prashant Choudhary 
Jabalpur MP
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Wednesday, May 18, 2016

Unknown

घर पर सब्जिया केसे उगाये Kitchen gardening tips hindi me

Home and Kitchen gardening tips hindi me 

Ghar pr sabji kese lagaye kitchen gardening tips in hindi
Gamle me sabji 
नमस्कार दोस्तों पिछले दिनों मरे मित्र विनय और एक महिला मित्र ने जिनके पास खेत नही है। उन्होंने मेरी पोस्ट बिना खेत और मिट्टी के kheti kese kre पड़ी। फिर उन्होंने मुझे कहा की "hum ghar pr khane ke liye sabjiya lagana chahte hai koi tarika ho to batao"
आज की मेरी पोस्ट उन सभी मित्रों के लिए है। जो खुद घर पर ताज़ा सब्ज़ियाँ लगा कर खाना चाहते है। और जिन्हें होम gardening का शोक है।
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Friday, May 6, 2016

Unknown

केसे करे खेती में नई तकनिक प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग पूरी जानकारी पढ़े।

किसान दोस्त में आज हम प्लास्टिक मल्चिंग के बारे में जानेंगे इसे क्यों लगाए  और क्या फ़ायदा मिलेगा विस्तार से जानते है।
plastik film malch ka upyog
प्लास्टिक मल्च लगा हुआ खेत 

प्लास्टिक मल्चिंग क्या है।

खेत में लगे पोधों की जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक फिल्म के द्वारा सही तरीके से ढकने की प्रणाली को प्लास्टिक मल्चिंग कहते है। यह फिल्म कई प्रकार और कई रंग में आती है।

इस तकनीक का क्या फ़ायदा होता है।

इस तकनीक से खेत में पानी की नमी को बनाए  रखने और वाष्पीकरण रोका जाता है। ये तकनीक खेत में मिटटी के कटाव को भी रोकती है। और खेत में खरपतवार को होने से बचाया जाता है। बाग़वानी में होने वाले खरपतवार नियंत्रण एवं पोधों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने में बहुत सहायक होती है।क्यों की इसमे भूमि के कठोर होने से बचाया जा सकता है और पोधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है।
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Saturday, April 30, 2016

Unknown

kisaan अगेती सब्जिया लगाने के लिए करे इन tacnik का उपयोग और kamaye jyda pese

नमस्कार माय किसान दोस्तों 
पिछले दिनों मुझे एक मित्र जो की my kisan dost का regular विजिटर है। उन्होंने मुझे अगेती sabjiyo के लिए प्रश्न किया था।उनका प्रश्न था की जब भी वो अगेती सब्जी बोते थे उनके पौधे ख़राब हो जाते थे और जो पौधे बच जाते थे वो भी उतना अच्छा उत्पादन नही दे पाते थे। काफी बातचीत करने के उपरांत हम इस नतीजे पर पहुचे की मूल समस्या भूमि जनित रोगों और उचित वातावरण नही मिलने के कारण हो रही थी। और मित्रों ये बात तो हम सब जानते है। की आज के युग में यदि किसान सिर्फ पुराने तरीके से खेती करता है। तो अपने परिवार का पालन पोषण करना भी कठिन हो जाता है। इसलिए किसान को खेती के लिए aadhunik  और नई तकनीक को अपना कर ही लाभ ले सकता है ।
आज हम kisan dost me दो तकनीक पर जानकारी देंगे। जिससे हम अगेती सब्ज़ियाँ लगा कर अधिक लाभ ले सके।
अगेती सब्जी बोने के लिए हम इन दो विधियों को जानेंगे 

1 ट्रे कल्टीवेशन (tray cultivation)2 प्लास्टिक लो टनल ( plastik low tunnel)

तो जानते है क्या हे ये विधिया

1 ट्रे कल्टीवेशन:-

tray cultivation kya hota hai
tray cultivation 

 इस प्रक्रिया में कई नई तकनीकों का आविष्कार हुआ है। इस तकनीक के उपयोग का मुख्य कारण है भूमि जनित रोगों से मुक्ति और पानी की बचत एवं पोधों का संरक्षण करना है। सबसे पहले हम जानते है ट्रे कल्टीवेशन क्या है? जैसा की इसके नाम से ही स्पष्ट है। यानि की ट्रे में खेती करना। इस तकनीक में प्लास्टिक की खानेदार ट्रे का उपयोग किया जाता है। खाने इसे होने चाहिए जिसमे पोधों की जड़ का बेहतर विकास हो सके।और कम मिटटी और पानी के अधिक से अधिक सब्जियां उगाई जा सके। ट्रे में सबसे पहले ग्रीन नेट और जुट बिछा कर वर्निकम्पोस खाद् डाला जाता है। फिर सही तरीके से उपचारित किये गये बिजो को उँगली या किल से उस खाद् में गड्डा कर के बीज को बोया जाता है।प्रत्येक खाने में एक एक बीज बोया जाता है।आप इसमे कोकोपिट,वर्मीकुलाइट,परलाइट को आय तन के आधार पर 3:1:1 में मिलाकर भी बना सकते हे। बीजो में अंकुरण के लिए पर्याप्त नमी आवश्यक होनी चाहिए बीज अंकुरित होने के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान अच्छा होता है। आप ट्रे के ऊपर मच्छर दानी की तरह नेट भी लगा दे ताकि पोधों को किट पतंग से सुरक्षा हो सके। अंकुरण के एक सप्ताह के बाद पौधे के लिए आवश्यक तत्व जैसे नाइट्रोजन,फास्फोरस,पोटाश को उचित अनुपात में 20:20:20 में घोल बना कर ट्रे में पानी के साथ दे। इस तकनीक से पौधे 25 से 30 में खेत में रोपने के लायक हो जाते है।
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Wednesday, March 16, 2016

Unknown

वैज्ञानिक तरीके से करे बेगन की खेती। और ज्यदा मुनाफा ले।

Mykisandost
बैगन की खेती

baigan ki kheti kese kre !

किसान बाग़वानी में आज बैंगन की खेती को वैज्ञानिक तरीके से कैसे करते है। इस पर बतायेगे 

सामान्य परिचय :-

  बैंगन की खेती भारत और चीन में ज्यादा की जाती है। ऊंचे पहाड़ि इलाकों को छोड़कर पुरे देश में इसकी खेती की जा सकती है। क्यों की भारत की जलवायु गर्म होती है और ये began ki kheti के लिए उपयुक्त रहती है।
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