Tuesday, April 26, 2016

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अच्छी पैदावार के लिए nai kism ki soyabeen आरवीएस 2001-4 की jaankaari

Soybean ki kheti
किसानों के लिए पीले सोने के नाम से प्रसिद्ध सोयाबीन की फसल पिछले कई सालों से या तो ज्यादा बारिश से गल जाती है। या कम बरसात के कारण ख़राब हो जाती है। सोयाबीन मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बोयी जाती है। और पिछले सालो से लगातार सोयाबीन की फसल ख़राब होने से किसानों की आर्थिक स्थिति में गिरावट आयी है।
मध्यप्रदेश के सीहोर  एग्रीकल्चर कॉलेज के विज्ञानिकों ने नई किस्म की सोयाबीन को ईजाद की है। जिसको आरवीएस 2001-4 के नाम से जाना जाता है।

सोयाबीन आरवीएस 2001-4 के बारे में :-

इस सोयाबीन की किस्म को ईजाद करने के लिए लगातार 10 वर्षो तक रिसर्च किया गया इसमें R.A.K(रफी अहमद किदवई ) एग्रीकल्चर कॉलेज सीहोर के डॉ.एम डी व्यास,डॉ.नन्दा खांडवे,डा.मोली सक्सेना ने रिचर्स टीम में शामिल रहे।
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 इस किस्म की विशेषता 
इसके पौधे 50 से 60 सेमी. के ऊचाई के होते है। और तीन चार शाखाओं में होता हे। इसमें लगने वाले फूल सफ़ेद रंग के और फली चकनी तथा बीज गहरे पीले रंग के होते है।
ये फसल कम पानी में न सूखेगी और ज्यादा बरसात होने पर ख़राब होगी।
इस पर कीड़ों का असर भी कम होगा।
अन्य किस्म की तुलना में 15 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोतरी होगी।
अन्य किस्में जैसे 9560,9305
जे एस 335 लगभग 100 या उससे अधिक दिनों में पक कर तैयार होती हे। वही ये नई किस्म 90 दिनों में पक कर तैयार हो जाएगी।
अन्य किस्मों की पैदावार सामान्य प्रति बीघे 4 से 5 क्विंटल  होती हे वही ये 5 से 6 क्विंटल अधिक पैदावार होती है।
आरएसवीकिस्म  में ज्यादा बरसात से इसके पोधो की जेड गलेगी नही
ओर यदि बरसात कम हुई तो भी इसके पोधे जल्दी नही सुखेगे।
खेत में पानी के भराव और सूखे में में भी पौधा संतुलित रहेगा।
और इल्ली के प्रकोप का भी असर कम होगा।

आरएसवी 2001-4 को मान्यता 

भारत में कृषि विज्ञानिकों के द्वारा रिसर्च कर के नई नई किस्मों बीज तैयार करने के बाद उसे पूरी रिपोर्ट के साथ उसे केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की सेंट्रल सीड रिलीज कमेटी को भेजा जाता है।
वहां पर बीज की पूरी वैज्ञानिक जाँच करने के बाद उसे अधिसूचित किया जाता है।
फिलहाल इस किस्म को सिर्फ प्रयोग के लिये किसानो को उपलब्ध कराया जायेगा। 
इस किस्म के लिए किसान सीहोर ग्वालियर के एग्रीकल्चर कॉलेज और अपने जिले के कृषि अनुसंधान केंद्र और कृषि विभाग में सम्पर्क कर सकते है
आभार किसान कॉल सेंटर 
सोयाबीन की इस वैराईटी के आने के बाद किसानों को सोयाबीन में होने वाले नुकसान से राहत मिल सकती है।
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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम yash jat है mykisandost.com मैने बनाई है 5 साल तक job करने के बाद अब में खेती करता हु में एक किसान का बेटा हु और हमेशा से ही खेती में मेरा लगाव रहा है मुझे खेती करना और अपने किसान दोस्तों की मदद करना अच्छा लगता है! जितना हो सके में उनसे सीखता हु और मेरे पास जो भी खेती किसानों से जुड़ी जानकारी होती है वो में इस webside के जरिये उनके साथ शेयर करता हु ताकि हम सब खेती से अधिक लाभ ले कर उन्नति कर सके...red more...

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