Sunday, March 20, 2016

my kisan dost

काला सोना यानि अफीम की फसल किसानो के लिए वरदान या अभिश्राप ।

काला सोना यानि अफ़ीम की फसल किसानों के लिए वरदान या अभिश्राप

हेल्लो दोस्तों ये एक gest post है। आप भी अपनी मन की बात।यहाँ भेज सकते है।
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Afim ki kheti
अफ़ीम  फसल 
काला सोना किसानों के लिए  वरदान या अभिशाप

 Afim (Opium) ki kheti krna kisano ke liye

यह साल अफ़ीम काश्तकार को लिए खून के आँसू रुला रहा है।
अफ़ीम की खेती करने वाला किसान।इस साल ब्रिटिश साम्राज्य में  जो किसानों की हालत थी वैसी हालत हो गयी है। अफ़ीम की फसल की खेती करना मतलब एक नवजात शिशु का पालन करने से भी ज्यादा मेहनती कार्य है। कुछ दिनों पहले आपने अखबार टीवी और न्यूज़ चैनलों पर नीमच,मंदसौर,चित्तौड़गढ़ के किसानों के द्वारा नीमच नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव किया गया वो खबर पढ़ी होगी। जिसमे हजारों की तादाद में किसान एकत्र हुए और अपनी मागो को लेकर ज्ञापन दिया।

मेरे बहुत से मित्रों को ने मुझसे पूछा की पूरा माजरा क्या है। आज में उन्हें इस लेख के माध्यम से बता रहा हू।
अफ़ीम की खेती में किसानों की बहुत ज्यादा लागत लगती है।
उसे 20 आरी की अफ़ीम के लिए 3 और 4 टन देसी खाद् डालना पड़ता है। खेत की 2 से 4 बार अच्छी जुताई करनी पड़ती हे।फिर मिट्टी को समतल करने के लिए पाटा फेरा जाता है। 2 से 3 हजार के बीज डालना पड़ता है। हर दूसरे तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ती है। फिर उसमे स्वस्थ पोधों की छंटाई के लिए हज़ारों रूपये के मजदूर लगते है। साथ में नील गाय और आवारा पशुओं से सुरक्षा के लिए काटेदार बाउंड्री में 50 हजार का ख़र्चा करना पड़ता है। अफ़ीम की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए दवाई का स्प्रे नही कर सकते हें इसलिए मज़दूरों से निदाई करवाना पड़ती है।फसल में डोडे लगने तक हजारों रूपये की रासायनिक दवाइयों का छिड़काव किया जाता है। किसान के एक सदस्य को हमेशा 24 घंटे खेत पर रख वाली करने के लिए रहना पड़ता है।
लाखों रूपये का ख़र्चा करने के बाद मौसम और प्रक्रति ने साथ न दिया तो सारी करनी धरी के धरी रह जाती है। इस वर्ष भी अफ़ीम किसानों के साथ ऐसा ही हुआ। अफ़ीम की फसल में अचानक पीलापन आया जिसका वीडियो मैंने youtube chenal पर ● अफीम की फसल पर आया अचानक पीलापन का रोग डाला था। इस प्रकार के रोग ने अफ़ीम किसानों को और ज्यादा दवाइयों के प्रयोग करने पर विवश कर दिया और लगातार दवाइयों के प्रयोग करने पर भी किसान अपनी फसल में सुधार ना ला सके।फलस्वरूप गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष लागत और भी अधिक हो गई
इतना ख़र्चा करने के बाद । शासन का नोटिस आया की किसान अपने खर्चे से फसल को नष्ट करने के लिए खेतो में रोटेवेटर चलाये। किसानों की एक आस बसी थी की वो पोस्ता दाना ले पायेंगे लेकिन इस आदेश ने उनकी कमर तोड़ दी।इसी को लेकर किसानों ने हंगामा किया और सरकार को ज्ञापन दिया।
क्यों की यदि रोटेवेटर चलता है। तो जो पोस्ता दाना डोडो में है वो खेत की मिट्ठी में मिल जाता है। और बरसात के बाद खेतो में असख्य मात्रा में उग जाता है। जिससे निदाई की श्रम लागत और ज्यादा बड जाती है।इसी बात को लेकर किसानो ने जो ज्ञापन दिया फिर जा कर सरकार ने आदेश दिए की किसान पोस्ता दाना ले सकेगा।
यह पोस्ट भी जरुर पढ़े।

1>>बिना खेत और मिट्टी के खेती का आधुनिक तरीका।

2>>जहरीले जानवर के काटने पर क्या करे। देसी तरीका

3>>नील गाय रोजड़ो से अफ़ीम को केसे बचाए।

4>>बोरवेल के लिए ज़मीन में पानी कहा मिलेगा।

लेकिन फिर भी किसानों को अधिकारियों के खेत पर आ कर मुआयना करने का इंतजार करना पड़ रहा है। और रात भर जाग के रखवाली करनी पड़ रही है क्यों की नीमच के आसपास के इलाकों में आये दिन डोडा चोरी हो रही हे। रात में रखवाली करने के लिए सोये किसानों पर अचानक 15 से 20 चोर आ कर दबोच लेते है और डोडे तोड़ कर भागने के साथ साथ किसानों के हाथ पैर भी तोड़ के जाते हें। इसे में अफ़ीम काश्तकार अपने जीवन तक दाव पर लगा कर खेती करता है।
और अंत में उसे यदि अच्छे मुनाफ़े की बजाय अपने किये पर पानी फिरता नजर आये तो घर में एसा माहौल छा जाता है जैसे घर का कोई सदस्य मर गया हो
जहा हम एक तरफ नेताओं को देश को खोकला करने के लिए कोसते रहते है वही इस वर्ष नारकोटिक्स विभाग की इस अफसरशाही ने जनता को यह भी जतला दिया की इन जनता के प्रतिनिधियों का होना कितना आवश्यक है
इन जनप्रतिनिधियों के इतने दबाव के बाद नारकोटिक्स विभाग को झुकना तो पडा किन्तु फिर भी इनकी अफसरशाही साफ़ नजर आ रही है
पुरानी कहावत है की ज़मीन पर गिरा गोबर भी धुल मिट्टी साथ लेकर ही उठता है उसी तर्ज पर
ये नारकोटिक्स फिर भी किसानों पर आर्थिक बोझ डालने से बाज नहीं आई और 300 से 400 रूपये प्रति आरी के सिर्फ इस नाम पर वसूल रहे है की हम आपकी फसल में रोटावेटर नही चलाएंगे जबकि यह आदेश हमारे जनता प्रतिनिधियों के दबाव डालने पर नारकोटिक्स कमिशनर द्वारा दिया गया है की किसान अपना पोस्ता दाना ले सकता है
अंततः मेरे इस लेख का उद्देश्य मात्र यही है की
अब समय आ गया है जनता को अपनी ताकत दिखाने का
यदि सारे किसान एकजुट होकर यह एलान भी कर देते की हम तो अफ़ीम में चीरा भी लगायेंगे और जो औसत मिलेगी वही देंगे तो भी इन अफसरशाही का झंडा लहरा ने वालो को झुकना ही पड़ता
अब किसानों को अपनी ताकत दिखानी है
मेरे इस लेख पर अपनी राय अवश्य दे।
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आपका अपना ek kisan dost
Afim ki kheti or kisan
चरण सिंह जाट (प्रगतिशील किसान)

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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम yash jat है mykisandost.com मैने बनाई है 5 साल तक job करने के बाद अब में खेती करता हु में एक किसान का बेटा हु और हमेशा से ही खेती में मेरा लगाव रहा है मुझे खेती करना और अपने किसान दोस्तों की मदद करना अच्छा लगता है! जितना हो सके में उनसे सीखता हु और मेरे पास जो भी खेती किसानों से जुड़ी जानकारी होती है वो में इस webside के जरिये उनके साथ शेयर करता हु ताकि हम सब खेती से अधिक लाभ ले कर उन्नति कर सके...red more...

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2 comments

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March 21, 2016 at 12:10 PM delete

बहुत अच्छा ब्लॉग बनाया है आपने सर मेरे पास भी कुछ ब्लॉग है www.populartips4u.com, www.hdonline.in, और एक है www.w3university.in कृपया देख कर बताएं क्या में ठीक से काम कर रहा हूँ

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my kisan dost
AUTHOR
March 21, 2016 at 9:26 PM delete

श्रवण जी मेने आपके तीनो ब्लाग देखे। मुझे बहुत अच्छे लगे । greet sir g और सबसे best hd online लगा । आपकी महनत काबिले तारीफ है।

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